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दशहरा 2026 कब है? 20 या 21 अक्टूबर, शुभ मुहूर्त और रावण दहन

 

Dussehra 2026 Date: दशहरा कब है? जानें 20 या 21 अक्टूबर, विजय मुहूर्त, रावण दहन और महत्व

Dussehra 2026 Date in India: दशहरा हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है, जिसे विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई, अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय का संदेश देता है। हर साल की तरह 2026 में भी देशभर में दशहरा श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। इस दिन भगवान श्रीराम की विजय और मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय का स्मरण किया जाता है।

अगर आप जानना चाहते हैं कि दशहरा 2026 कब है, रावण दहन किस दिन होगा, विजय मुहूर्त क्या है और इस पर्व का धार्मिक महत्व क्या है, तो इस लेख में आपको पूरी जानकारी मिलेगी। 

दशहरा 2026 कब है? (Dussehra 2026 Date)

वर्ष 2026 में उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों के अनुसार दशहरा 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार को मनाया जाएगा। हालांकि, कुछ क्षेत्रीय परंपराओं में विजयादशमी 21 अक्टूबर को मनाई जाएगी।

दशहरा आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व शारदीय नवरात्रि के समापन से भी जुड़ा हुआ है।

दशहरा 2026 की मुख्य जानकारी:

  • त्योहार का नाम: दशहरा या विजयादशमी
  • तारीख: 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार
  • दशमी तिथि प्रारंभ: 20 अक्टूबर को दोपहर लगभग 12:50 बजे
  • दशमी तिथि समाप्त: 21 अक्टूबर को दोपहर लगभग 2:11 बजे
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 1:59 बजे से 2:45 बजे तक
  • प्रमुख आयोजन: रामलीला, रावण दहन, पूजा और धार्मिक कार्यक्रम

नोट: ऊपर दिए गए तिथि और मुहूर्त के समय नई दिल्ली के पंचांग पर आधारित हैं। स्थानीय पंचांग और क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार समय या उत्सव की तारीख में अंतर हो सकता है।

dushera 2026

 

दशहरा 2026 का विजय मुहूर्त

हिंदू धर्म में विजय मुहूर्त को शुभ कार्यों के लिए विशेष महत्व दिया जाता है। दशहरे के दिन कई लोग भगवान श्रीराम की पूजा करते हैं, शमी वृक्ष की पूजा करते हैं और अपने कार्यों में सफलता की कामना करते हैं।

नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार 20 अक्टूबर 2026 को विजय मुहूर्त दोपहर 1:59 बजे से 2:45 बजे तक रहेगा।

इस समय के दौरान अपनी परंपरा के अनुसार पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान किए जा सकते हैं। पूजा के लिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग का समय देखना उचित रहेगा।

दशहरा क्यों मनाया जाता है?

दशहरा मनाने के पीछे दो प्रमुख धार्मिक मान्यताएँ प्रचलित हैं।

1. भगवान श्रीराम की रावण पर विजय

रामायण की कथा के अनुसार, लंका के राजा रावण ने माता सीता का हरण किया था। इसके बाद भगवान श्रीराम ने रावण के विरुद्ध युद्ध किया और अधर्म का अंत करके धर्म की स्थापना की।

मान्यता है कि भगवान श्रीराम की विजय की स्मृति में विजयादशमी का त्योहार मनाया जाता है। इसी कारण देश के अनेक हिस्सों में दशहरे पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है।

2. मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय

दशहरे का संबंध मां दुर्गा की विजय से भी है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां दुर्गा ने महिषासुर नामक असुर का वध करके देवताओं और संसार को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई थी।

इसलिए विजयादशमी को शक्ति, साहस और धर्म की विजय का प्रतीक माना जाता है। बंगाल और भारत के कई अन्य क्षेत्रों में दुर्गा पूजा के बाद विजयादशमी विशेष उत्साह के साथ मनाई जाती है।

दशहरे पर रावण दहन कब होगा?

दशहरे के दिन उत्तर भारत के अनेक शहरों और कस्बों में रामलीला का आयोजन किया जाता है। शाम के समय रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है।

वर्ष 2026 में उत्तर भारत के अधिकांश क्षेत्रों में रावण दहन 20 अक्टूबर की शाम को होने की संभावना है। हालांकि, रावण दहन का सही समय स्थानीय आयोजन समिति, सूर्यास्त और धार्मिक परंपराओं के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।

रावण दहन का उद्देश्य केवल एक परंपरा निभाना नहीं, बल्कि अहंकार, अन्याय और बुराई से दूर रहने की प्रेरणा देना भी है।

दशहरे की पूजा कैसे करें?

दशहरे के दिन श्रद्धालु अपनी पारिवारिक और क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार पूजा करते हैं। सामान्य रूप से पूजा की विधि इस प्रकार हो सकती है:

  1. सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. पूजा स्थल की सफाई करके भगवान श्रीराम और मां दुर्गा का स्मरण करें।
  3. अपनी श्रद्धा के अनुसार फूल, फल, दीपक और नैवेद्य अर्पित करें।
  4. भगवान श्रीराम की आरती करें और उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने का संकल्प लें।
  5. परंपरा के अनुसार शमी वृक्ष की पूजा या अपराजिता पूजा करें।
  6. परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें।

पूजा की विधि अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में भिन्न हो सकती है। इसलिए अपनी परंपरा के अनुसार पूजा करना उचित है।

दशहरे पर शमी वृक्ष की पूजा का महत्व

दशहरे पर शमी वृक्ष की पूजा करने की परंपरा भी प्रचलित है। धार्मिक मान्यताओं में शमी वृक्ष को शुभता, विजय और समृद्धि से जोड़ा जाता है।

कई स्थानों पर इस दिन शमी वृक्ष के सामने दीपक जलाया जाता है और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। कुछ परंपराओं में अपराजिता पूजा और सीमोल्लंघन का भी विशेष महत्व है।

शमी पूजा की विधि और समय के लिए स्थानीय पंचांग तथा पारिवारिक परंपराओं का पालन किया जा सकता है।

दशहरा 2026 का धार्मिक और सामाजिक महत्व

दशहरा हमें सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी सत्य और धर्म का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए। भगवान श्रीराम का जीवन मर्यादा, कर्तव्य, धैर्य और आदर्श आचरण की प्रेरणा देता है।

इस पर्व का महत्व केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है। यह हमें अपने व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने का अवसर भी देता है।

दशहरे से मिलने वाली प्रमुख शिक्षाएँ हैं:

  • हमेशा सत्य और न्याय का साथ देना चाहिए।
  • अहंकार और क्रोध से बचने का प्रयास करना चाहिए।
  • अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करना चाहिए।
  • दूसरों के प्रति सम्मान और करुणा का भाव रखना चाहिए।
  • बुराइयों को छोड़कर अच्छे गुणों को अपनाना चाहिए।

भारत में दशहरा कैसे मनाया जाता है?

भारत के अलग-अलग राज्यों में दशहरा अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है।

उत्तर भारत: यहां रामलीला, भगवान श्रीराम की पूजा और रावण दहन प्रमुख आकर्षण होते हैं।

पश्चिम बंगाल: दुर्गा पूजा के समापन और मां दुर्गा की विदाई के साथ विजयादशमी मनाई जाती है। वर्ष 2026 में यहां विजयादशमी 21 अक्टूबर को पड़ती है।

मैसूर, कर्नाटक: मैसूर दशहरा अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। यहां उत्सव में विशेष जुलूस और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

महाराष्ट्र और अन्य क्षेत्र: कई स्थानों पर शमी पूजा, अपराजिता पूजा और पारंपरिक धार्मिक कार्यक्रम किए जाते हैं।

इन विविध परंपराओं के बावजूद दशहरे का मूल संदेश एक ही है—अच्छाई की विजय और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा।

दशहरा 2026 से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

प्रश्न 1: दशहरा 2026 में कब है?

उत्तर: उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों के अनुसार दशहरा 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार को मनाया जाएगा।

प्रश्न 2: क्या दशहरा 20 या 21 अक्टूबर को है?

उत्तर: अधिकांश उत्तर भारतीय पंचांगों के अनुसार दशहरा 20 अक्टूबर को है, जबकि बंगाल सहित कुछ क्षेत्रों में विजयादशमी 21 अक्टूबर को मनाई जाएगी।

प्रश्न 3: दशहरा 2026 का विजय मुहूर्त क्या है?

उत्तर: नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार विजय मुहूर्त दोपहर 1:59 बजे से 2:45 बजे तक है।

प्रश्न 4: दशहरे पर रावण दहन क्यों किया जाता है?

उत्तर: रावण दहन भगवान श्रीराम की रावण पर विजय और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।

प्रश्न 5: क्या दशहरा और विजयादशमी एक ही त्योहार हैं?

उत्तर: हां, सामान्य रूप से दशहरा और विजयादशमी एक ही पर्व के नाम हैं। हालांकि, क्षेत्रीय परंपराओं के कारण इनके आयोजन की तारीख में अंतर हो सकता है।

प्रश्न 6: दशहरे पर किसकी पूजा की जाती है?

उत्तर: इस दिन भगवान श्रीराम, मां दुर्गा और क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार शमी वृक्ष तथा मां अपराजिता की पूजा की जाती है।

निष्कर्ष

दशहरा 2026 का पर्व हमें सत्य, साहस, मर्यादा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों के अनुसार यह त्योहार 20 अक्टूबर, मंगलवार को मनाया जाएगा, जबकि कुछ क्षेत्रों में विजयादशमी 21 अक्टूबर को मनाई जाएगी।

इस शुभ अवसर पर हमें भगवान श्रीराम के आदर्शों से प्रेरणा लेकर अपने जीवन में अच्छे विचारों और सकारात्मक व्यवहार को अपनाने का प्रयास करना चाहिए।

आप सभी को दशहरा 2026 की हार्दिक शुभकामनाएँ। भगवान श्रीराम आपके जीवन में सुख, शांति और सद्बुद्धि प्रदान करें।

जय श्रीराम!

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