Meaning to be yourself स्वयं के होने का अर्थ

                       Meaning to be yourself।                                                                                                                             
   
 .                                                                                                                                                                                       Meaning to be yourself.    स्वयं के होने का अर्थ     हम मनुष्य की योनि प्राप्त कर संसार में बड़े भाग्य से आते हैं , ऐसी मान्यता है । आज यदि हम अपने जीवन की अब तक की यात्रा के विस्तार पर नजर डालें तो क्या कभी ऐसा नहीं लगता है कि एक बार पुनः पिछले बिताए दिन वापस मिल जाएं । जो कुछ अब तक नहीं कर पाए या जो त्रुटियां रह गईं , उन्हें सुधार सकें , पर ऐसा संभव नहीं । उचित यही है , हम जीवन के जिस भी पड़ाव पर हों , वहीं से अपने होने का अर्थ ढूंढने का प्रयास आरंभ कर दें । सद्गुरुओं की मानें तो हमारा जीवन तभी सार्थक हो सकता है जब स्वयं की स्वार्थ पूर्ति के साथ थोडा दूसरों के लिए भी करते चलें । किसी के आंस पोंछना , किसी बेसहारा का साथी बनना या फिर अपने अनुचित व्यवहार पर पश्चाताप होना भी स्वयं को जानने का मार्ग ही है । यह सत्य है कि द्रव्य आने पर मनुष्य अपनी सहजता खो बैठता है , संग्रह की प्रवृत्ति जन्म लेती है , पर प्रकृति से यह सीखना होगा कि यदि एक ओर से आने का मार्ग है तो दूसरी ओर निकासी अवश्य हो , अन्यथा किसी भी वस्तु का अत्यधिक संग्रह विनाश का कारण बन सकता है । संग्रह के साथ थोड़ा परिग्रह का भी मेल होना चाहिए , फिर वह चाहे द्रव्य हो , सुख - सुविधाएं या ज्ञान हों । वे लोग सही अर्थ में साधु समान ही होते हैं जो वृक्ष की भांति जीवन यापन करते हैं , वृक्ष जिसका प्रत्येक अंग दूसरों के काम आता है । देखा जाए तो वृक्षों से हम परंपरा एवं समर्पण जैसे गणों का अपने जीवन में समावेश कर सकते हैं । हर किसी के जीवन यापन के मापदंड , अर्थ भिन्न होते हैं , लेकिन परमार्थ के मार्ग पर चलने वाले अवश्य ही स्वयं को अधिक परिपूर्ण , समृद्ध एवं संतुष्ट अनुभव कर पाते होंगे । हम अक्सर सब कुछ जानने , समझने का दंभ तो भरते हैं , लेकिन खुद स्वयं के पास नहीं पहुंच पाते , शायद ऐसा चाहते भी नहीं । किसी ने सही कहा है - जब आंख खुले , तभी सवेरा है ।

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